दिवाली है त्यौहार मानने कोज्ञान दीप जलाकर अज्ञान भगाने कोआत्म बोध के बाण से "मैं" को हराने कोअद्वैत वेदांत से आनंद रस में आने कोराम अद्वैत है, श्याम अद्वैत हैअद्वैत है सत्य, सत्य स्वीकार ज्ञानी को🙏
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
नर्क की आदत
वृत्ति को और छोटा करते हैं - आदत से शुरू करते हैं। व्यक्ति अधिकांशत अपनी आदत का गुलाम होता है अपनी कल्पना में हम खुद को आज़ाद कहते हैं, पर क...
-
गुरुकृपा कोई विशेष चीज़ होती नहीं, क्योंकि वो सदा है, सर्वत्र है। मनुष्य के लिए सत्य ही गुरु है और जीवन ही गुरुकृपा है। जीव इंद्रियों का ग़ु...
-
ज्ञान केवल अज्ञान का अंत है। अध्यात्म में अज्ञान केवल परिवर्तन से आसक्ति (बंधन) है। अध्यात्म मे अज्ञान का अंत, आत्मबोध है। आत्मबोध का उदय, ...
-
जीवन आपको व्यस्त रखे है, उलझाए हुए है, जीवन लगातार गतिमान है। कुछ-न-कुछ नया लगातार आपके सामने आ ही रहा है। कोई-न-कोई चुनौती आपके सामने है। ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें